5 दिसंबर 2019 - 17:17
क्या नेतेन्याहू और ट्रम्प ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ने पर सहमत हो गये हैं? क्या तेहरान कमज़ोर है? क्या होगा इस महायुद्ध का परिणाम?

वरिष्ठ अरब पत्रकार अब्दुलबारी अतवान ने रायुलयौम में अपने एक लेख में ईरान के खिलाफ अमरीका व इस्राईल के संभावित युद्ध और उसके परिणाम के बारे में कई महत्वपूर्ण बिन्दुओं का उल्लेख किया है। आप भी पढ़ें।

  आज कल जो इस्राईली जनरलों और उनके अमरीकी साथियों के बयानों और इसी प्रकार फार्स की खाड़ी में अमरीकी सैनिकों और युद्धपोतों के जमघटे पर ध्यान दे रहा होगा उसे यह विश्वास हो गया होगा कि ईरान पर जल्द ही हमला हो सकता है और उसे यह भी अंदाज़ा होगा कि ईरान को इस खतरे का आभास है और वह इस प्रकार के संभावित खतरे का मुक़ाबला करने के लिए तैयारी की कर चुका है लेकिन क्या सच में ईरान पर इस तरह का कोई हमला हो सकता है? यह एक चर्चा का विषय है। सब से पहले कुछ बिन्दुओं पर ध्यान देः

पहलाः इस्राईली खुफिया एजेन्सी से संबधिंत वेबसाइट, " दुबका" ने बताया है कि रविवार की शाम अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प और उनके दोस्त, नेतेन्याहू के बीच टेलीफोनी बात चीत, ईरान के खिलाफ तत्काल सैनिक हमले पर केन्द्रित रही है।

दूसराः  अमरीका के बड़े बड़े जनरल, सैन्य अधिकारी, वायु सेना प्रमुख और अमरीकी सेनाध्यक्ष, निंरतर तेलअबीब की यात्रा कर रहे हैं और अपने इस्राईली समकक्षों से बात चीत कर रहे हैं  जो वास्तव में ईरान के खिलाफ किसी आने वाले युद्ध की तैयारी से संबंधित हो सकती है।

तीसराः फार्स की खाड़ी के देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से भेंट के लिए इस्राईली सेना के अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल वाशिंग्टन गया है। विशेषकर सऊदउ अरब, यूएई और बहरैन के सैन्य अधिकारियों से बात चीत करने, इस दौरान अनाक्रण संधि पर हस्ताक्षर होंगे और ईरान के खिलाफ किसी भी प्रकार के युद्ध में भूमिकाओं का बंटवारा भी होगा जिसमें इस्राईली युद्धक विमानों और सैनिकों को एयरबेस देना भी शामिल है।

चौथाः अमरीका के विशालकाय विमान वाहक युद्ध पोत अब्राहम लिंकन हुरमुज़ स्ट्रेट से गुज़रते हुए फार्स की खाड़ी पहुंच गया है।

अमरीकी और इस्राईली अधिकारियों ने अपनी आदत के मुताबिक कहा है कि यह सब कुछ इस लिए हो रहा है क्योंकि ईरान इस्राईली लक्ष्यों पर हमला करने की योजना बना रहा है ताकि दमिश्क़ के निकट ईरानी व सीरियाई लक्ष्यों पर इस्राईल के राकेट हमले का बदला लिया जा सके।

     सच्चाई इन सब से बिल्कुल अलग है। पश्चिमी सूत्रों का कहना है कि अमरीका व इस्राईल इस बात पर सहमत हैं कि इस समय ईरान बेहद कमज़ोर स्थिति  में है विशेष कर इस देश में होने वाले हालिया प्रदर्शनों के बाद जो पेट्रोल के दाम में वृद्धि के बाद आरंभ हुए थे। इसके अलावा ईरान के मित्र देशों इराक़ और लेबनान में भी प्रदर्शन हो रहे हैं इस लिए इन प्रदर्शनों से फायदा उठाने का यह सब से अच्छ अवसर है।

     इस्राईल के नये युद्ध मंत्री नेफताली बीनीत मीडिया सूत्रों के अनुसार ईरान के खिलाफ हमले के सब से बड़े समर्थक हैं और कहा जा रहा है कि वह सैन्य ताक़त से ईरान को सीरिया से निकालने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि इस्राईल ने 25 साल पहले हिज़्बुल्लाह की ताक़त के बारे में बेहद गलत अनुमान लगाया था जिसका परिणाम हिज़्बुल्लाह के पास लगभग डेढ़ लाख मिसाइल के भयानक सपने के रूप में सामने आया है।

     हम इस बात से इन्कार नहीं करते कि लेबनान और इराक़ में होने वाले प्रदर्शनों से जिसकी वजह से इन दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को त्यागपत्र देना पड़ा, ईरान के घटकों को नुक़सान पहुंचा है और इन हंगामों के पीछे अमरीका, इस्राईल और उसके क्षेत्रीय घटकों को ज़िम्मेदार ठहराने में ईरान के वरिष्ठ नेता ने कोई हिचकिचाहट नहीं दिखायी लेकिन ईरान पर किसी भी प्रकार का अमरीकी या इस्राईली हमले का उल्टा नतीजा निकलेगा और इराक़ व लेबनान की जनता एकजुट होकर अपने देश की सरकार का समर्थन करेगी क्योंकि सीरिया, लीबिया, यमन और इराक़ में अमरीकी सैन्य कार्यवाही के परिणाम में जो हालात बने हैं वह अब भी सब को अच्छी तरह से याद हैं।   

     एक दूसरी बात यह भी है कि इन हालात में ईरानी नेतृत्व हाथ पर हाथ धरे तो नहीं बैठा रहेगा और न ही ईरानी जनता और वहां की सेना, अमरीकी व इस्राईली युद्धक विमानों और मिसाइलों का नाच गाकर और फूल बिखेर कर स्वागत नहीं करने वाली।

     प्रदर्शनों के राजनीतिक प्रभाव हो सकते  हैं लेकिन वह प्रभाव सैनिक क्षमता पर नहीं पड़ेंगे। ईरानी मिसाइलों की विनाशाकारी ताक़त अब भी पहले जैसी है और यही हाल सीरिया, इराक़, लेबनान, यमन और गज़्ज़ा पट्टी में ईरान के घटकों की मिसाइल शक्ति का भी है। शायद यही वजह है कि तीन दिन पहले, ईरान के क्रांति  संरक्षक बल आईआरजीसी के अधिकारी जनरल नूरुल्लाह ने कहा था कि फार्स की खाड़ी में 21 अमरीकी छावनियों पर मिसाइल बरसेंगे और ईरान ने अपने सब से बड़े दुश्मन के साथ महायुद्ध की तैयारी कर रखी है।

     प्रदर्शन तो हर देश में होते हैं और उनका राजनीतिक प्रभाव होता है लेकिन जब युद्ध की आग भड़केगी तो यह सब चीज़ें पीछे रह जाएंगी, नेतेन्याहू की प्रधानमंत्री बनने की इच्छा, ईरान के खतरे को खत्म करने की आंकाक्षा और उनके साथ उनके सारे अरब दोस्त, रेत की दीवार की तरह ढह जाएंगे और जैसा कि हमने पहले भी कहा है यह आखिरी लड़ाई होगी, इस से पूरा इलाक़ा बदल जाएगा, बहुत की सरकारें और राष्ट्र मिट जाएंगे, नयी सीमाएं खींची जाएंगी और नयी शक्तियां सामने आएंगी... आप सब भी देखेंगे। (Q.A.) साभार, अब्दुलबारी अतवान, रायुलयौम, लंदन